डॉ0 हरि नाथ मिश्र

 *षष्टम चरण*(श्रीरामचरितबखान)-1

करउँ प्रनाम राम भगवाना।

जोगेस्वर बल सिंह समाना।।

      ग्यानगम्य-गुन-निधि-देवेस्वर।

       निर्बिकार-अजित-अखिलेस्वर।।

रघुबर मायातीत-बिरागी।

भगत-बछल अरु सिव-अनुरागी।।

      खल-बधरत प्रभु राम गोसाईं।

      छल-प्रपंच प्रभु मनहिं न भाईं।।

बंदउ सदा जोरि दोउ पानी।

सिव संकर सँग उमा भवानी।।

     आभा चंद्र संख की नाई।

     संकर-बदन सबहिं जग भाई।।

कासीपति अरु कलिमल नासी।

सिवहिं कल्प कैलास निवासी।।

     गंगा सिर उर ब्याल कराला।

      सोहै चंद्र ललाट बिसाला।।

दोहा-करै बंदना जगत जे,रामहिं-सिवहिं समान।

         होवै तिसु जन यहि जनम, मंगल अरु कल्यान।।

                      डॉ0हरि नाथ मिश्र

                        9919446372

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