हलधर -9897346173

(विश्व नारी दिवस पर महलों को समर्पित )


ग़ज़ल (हिंदी)
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नारी  नर  से  सदा बड़ी है ।
गाथा जिसकी भरी पड़ी है ।


जब भी मौका मिला उसे वो ,
हर मौके पर खूब लड़ी है ।


नर को रखा कोख में जिसने,
नारायण की एक कड़ी है ।


धरती पर आदम को लायी ,
गौरा शंकर साथ खड़ी है ।


घड़ा पांच रुपये में मिलता ,
लाख टके की मिले घड़ी है ।


तुलना करना काम मूर्ख का ,
शब्दों की बस कथा जड़ी है ।


भाव उभर जो भी मन आया,
हलधर" जोड़ी छंद  लड़ी है ।
      
  हलधर -9897346173


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