बसन्तोत्सव 2021 काव्य रंगोली आशुकवि नीरज अवस्थी

 कविता लिखने से कभी लिख ना पाया गीत।

मातु शारदे की कृपा से लिख जाते गीत।1

खण्ड काव्य भी रच दिए समय हुआ अनुकूल।

एक पंक्ति में फंस गए गए व्याकरण भूल।2

नित्य सृजन साहित्य का करते सुकवि सुजान।

जैसे धरती शीश पर धरे शेष भगवान।3

जो जन्मा है जगत में,उसका होगा अंत।

सदा आपके ह्रदय में बीते सुखद बसन्त।। 4

नीरज नयनो से करूँ वन्दन बारम्बार।

हंस वाहिनी की कृपा बरसे अपरम्पार।।5

आशुकवि नीरज अवस्थी


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