एस के कपूर श्री हंस

*।।ग़ज़ल।।संख्या 86 ।।*
*।।काफ़िया।।      आर।।*
*।। रदीफ़।।          थी  ।।*
1
गज़ब के  दिन और रात  गुलज़ार थी
मिलने जुलने का दौर  और बहार थी
2
रोक टोक की तो कोई   बात  छोड़िये
जैसे अपना राज़ अपनी   सरकार थी
3
पिज़्ज़ा बर्गर चाट मसालाओ समोसा
रोग प्रतिरोधकता की नहीं दरकार थी
4
घर का खाना   नियमित   दिन   चर्या
यह बात तो संबको लगती  बेकार थी
5
प्रकृति का दोहन  और शोषण चलता
किसी की न पेड़ बचाने की पुकार थी
6
खूब थी  रौनक  जिन्दगी के  सफ़र में
दोस्ती दुश्मनी   एक बेजा औज़ार थी
7
खुशी ही खुशी    बिखरी थी हर तरफ
फिर भी जाने क्यों  जिंदगी  बेज़ार थी
8
जब हमने टटोला  मसले को अंदर तक
हवा पानी पेडपौधों से दूरी बरक़रार थी
9
*हंस* जब आई   यह    कॅरोना महामारी
देखा जीनेका तरीका हम पे हथियार थी
*रचयिता।।एस के कपूर "श्री हंस*"
*बरेली।।।।*
मोब।।।।।        9897071046
                      8218685464
।।रचना शीर्षक।।*
*।।भाग्य फल नहीं,कर्म फल है*
*सफलता की कुँजी।।*
*।।विधा ।।मुक्तक।।*
1
हौंसले मुसीबत में   ताकत 
की  दवा   देते हैं।
जो रखते हैं जरा संयम  वो
जंग जीत लेते हैं।।
माना कि बुरा वक्त  सताता
पर है सिखाता भी।
वही हुऐ  सफल जो  हमेशा
वक़्त से     चेते  हैं।।
2
वक़्त ख़राब हो पर  ये  बीत 
ही    जाता       है।
हमारी आंतरिक   शक्ति  को
बना मीत लाता है।।
नहीं घबराते जो यूँ ही  किसी
भी   कठनाई   से।
वही आगे चल कर   सफलता
गीत    गाता   है।।
3
स्नेह संवाद से रिश्तों  की जरा
तुरपन   करते रहें।
सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ  ही आप
समर्पण करते रहें।।
मन से आप सम्पन्न बनाये सदा
अपने  आप     को।
आप अपना आत्म  अवलोकन
दरपन  करते   रहें।।

*रचयिता।।एस के कपूर "श्री हंस"*
*बरेली।।।।*
मोब।।।।।       9897071046
                     8218685464

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