श्रमिक दिवस कविता

1मई मजदूर दिवस कविता


1मई मजदूर दिवस पर 
संसार के समस्त प्राणी किसी न किसी रूप में अगर देखा जाए तो मजदूर ही हैं  मजदूरी का स्तर ऊंचा नीचा हो सकता है । मानसिक बौद्धिक शारीरिक डेली  सीजनल  परमानेंट  विशिष्ट अति वीशिष्ट सामान्य  निम्न वर्गीय  संगठित असंगठित  तमाम क्षेत्र केटेगरी है ,किंतु  समस्त प्राणी मात्र  मजदूर ही है  मजदूरी में उनको चाहे धन मिलता हो चाहे संतोष मिलता हो संतुष्टि मिलती हो , अगर आप वर्क करते हैं कार्य करते हैं श्रम करते हैं,तो मेरे हिसाब से मजदूर की ही श्रेणी में समस्त प्राणी मात्र आ जाता है, इसी परिपेक्ष्य में  छोटी सी  मजदूरों को सम्मानित करती हुई रचना देखें।-


प्राणि मात्र का एक काम है करना पड़े जरूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।


इस धरती का हर् एक प्राणी करता है मजदूरी।
कोई धन पाने की खातिर किसी की है मजबूरी।
खेत बाग में करे कमाई कोई घर से दूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।


नभ को छूने वाली  या सागर तल की तकनीक।
जहां कही कुछ बिगड़ हुयी मजदूर कर रहे ठीक।
रेल हवाई भूतल पर बस यान चले भरपूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।


अकुशल कुशल प्रशिक्षित शिक्षित तरह तरह के लोग।
कर्मठ स्वस्थ कर्मकारो के कभी न होते रोग।
भवन गगन चुम्बी पुल सड़कें निर्माता मजदूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।
जयति जय जय जय जय मजदूर।
आशुकवि नीरज अवस्थी
                                           क्रमशः


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